rajnitiwala.com Special: देवास भाजयुमो अध्यक्ष की कुर्सी: बैनर लगाने वाले बनाम बैनर पर फोटो लगाने वाले!

rajnitiwala.com Special :
देवास भाजयुमो अध्यक्ष की कुर्सी: बैनर लगाने वाले बनाम बैनर पर फोटो लगाने वाले!
राजनीतिवाला विशेष संवाददाता, देवास। भारतीय जनता युवा मोर्चा जिला देवास के अध्यक्ष पद की नियुक्ति को लेकर जिले की राजनीति गरमा गई है। करीब एक दर्जन से ज्यादा युवा कार्यकर्ता इस कुर्सी की दौड़ में शामिल हैं। कोई वर्षों से संगठन के लिए पसीना बहा रहा है, तो कोई सीधे कुर्सी तक पहुंचने की तेज रफ्तार में दिखाई दे रहा है।
जिले के बड़े भाजपा नेताओं के पुत्र और रिश्तेदारों की सक्रियता ने इस दौड़ को और दिलचस्प बना दिया है। संगठन के भीतर अब चर्चा सिर्फ नामों की नहीं, बल्कि बैकग्राउंड की भी हो रही है। मेहनत करने वाले कार्यकर्ता उम्मीद लगाए बैठे हैं कि इस बार संगठन उनकी तपस्या को देखेगा, जबकि कुछ दावेदारों की ताकत उनके राजनीतिक रिश्तों को माना जा रहा है।

कतार लंबी, कुर्सी एक
भाजयुमो अध्यक्ष की कुर्सी एक है और दावेदार दर्जन भर से ज्यादा। हर दावेदार अपने-अपने समर्थकों के साथ सक्रिय है। मुलाकातों का दौर तेज है, वरिष्ठ नेताओं के दरवाजों पर दस्तक बढ़ गई है और संगठन के प्रति समर्पण की फाइलें भी अपडेट की जा रही हैं।
बैनर लगाने वाले बनाम बैनर पर फोटो लगाने वाले
संगठन के गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की है कि सालों से पोस्टर-बैनर लगाने वाले कार्यकर्ता लाइन में हैं, जबकि कुछ ऐसे चेहरे भी दौड़ में हैं जिनकी फोटो सीधे बैनर के बीच में छपने की परंपरा रही है। ऐसे में जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच हल्की नाराजगी भी दिखाई दे रही है।
मेहनत बनाम पहचान की जंग
कई युवा कार्यकर्ताओं का मानना है कि अगर नेता पुत्र या रिश्तेदारों को प्राथमिकता मिलती है तो संगठन में मेहनत करने वालों का मनोबल कमजोर हो सकता है। उनका कहना है कि संगठन की असली ताकत वही कार्यकर्ता हैं जो हर कार्यक्रम में बिना नाम और पद के मैदान में खड़े रहते हैं।
भाजपा में कुछ भी अंतिम नहीं…
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि भाजपा संगठन में अंतिम समय तक समीकरण बदलते रहते हैं। कई बार ऐसा नाम सामने आता है जो पूरी दौड़ में चुपचाप काम करता रहता है और अंत में बाजी मार लेता है। इसलिए सभी दावेदार अभी पूरी ताकत से मैदान में हैं।
• संगठन का गणित:
मेहनत + समर्पण = उम्मीद
रिश्तेदारी + पहचान = संभावना
• कार्यकर्ताओं की फुसफुसाहट:
“हम पोस्टर लगाते रहे, कोई पोस्टर पर चढ़ता रहा।”
• चाय की दुकान पर चर्चा:
“इस बार देखना है कि संगठन कार्यकर्ता चुनता है या परिवार।”
• राजनीतिक सूत्रों की मुस्कान:
“देवास की राजनीति में कुर्सी वही पाता है, जो सही समय पर सही दरवाजा खटखटाता है।”
अब देवास की राजनीति में सबकी नजर एक ही फैसले पर टिकी है—भाजयुमो अध्यक्ष की कुर्सी पर संगठन का सिपाही बैठेगा या राजनीतिक परिवार का वारिस। आने वाले दिनों में तस्वीर साफ हो जाएगी।



